नरेंद्र मोदी के राज़ में भी पूर्वोत्तरवासियों से हो रहा है भेदभाव
अगर यह सच है, तो इससे कोई भी विवेकशील भारतीय परेशान होगा। खबर है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अहमदाबाद यात्रा के दौरान वहां के एक होटल ने उत्तर-पूर्वी राज्यों के अपने कर्मचारियों को काम पर न आने का आदेश दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसकी जांच कराने का आदेश देकर उचित कदम उठाया है। अब उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच शीघ्र पूरी हो। जांच से यह सामने आना चाहिए कि क्या सचमुच ऐसा आदेश दिया गया और अगर हां, तो उसे किसने जारी किया। जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि ऐसे आदेश से सभ्य आचरण के कई मान्य सिद्धांतों का उल्लंघन होता है। पहली बात तो यही कि यह नस्लीय आधार पर भेदभाव की मिसाल है।
इसके जरिए अनावश्यक रूप से उत्तर-पूर्व के बाशिंदों पर शक जताया गया। फिर कोई अधिकारी देश के नागरिकों और तिब्बती शरणार्थियों में फर्क न कर पाए, तो क्या उसे जिम्मेदार पद पर रहना चाहिए? चीनी शासकों की भारत यात्रा के दौरान यहां रहने वाले तिब्बती शरणार्थियों द्वारा विरोध प्रदर्शन की रवायत पुरानी है। इस बार भी ऐसे प्रयास हुए। मगर उत्तर-पूर्व के भारतीय नागरिकों का ऐसे प्रदर्शनों से कोई लेना-देना नहीं होता। फिर भी सिर्फ इसलिए कि उनके नाक-नक्श तिब्बतियों से मिलते-जुलते हैं, उन्हें गड़बड़ी के संभावित स्रोत के रूप में चिह्नित किया गया, तो यह आपत्तिजनक है। उत्तर-पूर्व के निवासियों में यह शिकायत पहले से पैठी हुई है कि बाकी भारत में उनसे भेदभाव होता है। अहमदाबाद जैसी घटनाएं इस भावना को और गहरा बनाती हैं। अत: केंद्र को इस मामले में ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए, जो मिसाल बने और जिससे अपने देश के उन भागों में सही संदेश जाए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शी जिनपिंग की गुजरात यात्रा अपने पीछे विवाद छोड़ गई।
एक अन्य आरोप यह लगा है कि उस दौरान गुजरात सरकार द्वारा बांटे गए नक्शों में अक्साई चिन को चीन के हिस्से और अरुणाचल प्रदेश को विवादास्पद क्षेत्र के रूप में दिखाया गया। अगर यह गलती हुई तो जाहिर तौर पर इसके लिए राज्य सरकार के अधिकारी दोषी होंगे। अब यह गुजरात सरकार और केंद्र की जिम्मेदारी है कि इस मामले की सच्चाई का वे पता लगाएं और दोषी अफसरों पर कार्रवाई करें।चीन के राष्ट्रपति की यात्रा से भारत-चीन रिश्ते के प्रगाढ़ होने की आशा की गई थी। इस दौरान कारोबार के क्षेत्र में कई अहम समझौते हुए भी। मगर अनेक विवादों का साया भी इस पर पड़ा। नतीजतन, सद्भाव के बजाय कर्कशता अधिक उत्पन्न हुई है। इसके लिए खास तौर पर चीन ही दोषी है, जिसने शी जिनपिंग की यात्रा के साथ ही लद्दाख के चुमार क्षेत्र में घुसपैठ कर नया तनाव पैदा कर दिया। शी के जाने के बाद वहां हालात और बिगड़े हैं। इस बीच अहमदाबाद से आई खबरों ने और भी बदमजगी पैदा कर दी है। प्रभावी जांच और उचित कार्रवाई ही इसका समाधान है।
- नईदुनिया हिंदी दैनिक से साभार
इसके जरिए अनावश्यक रूप से उत्तर-पूर्व के बाशिंदों पर शक जताया गया। फिर कोई अधिकारी देश के नागरिकों और तिब्बती शरणार्थियों में फर्क न कर पाए, तो क्या उसे जिम्मेदार पद पर रहना चाहिए? चीनी शासकों की भारत यात्रा के दौरान यहां रहने वाले तिब्बती शरणार्थियों द्वारा विरोध प्रदर्शन की रवायत पुरानी है। इस बार भी ऐसे प्रयास हुए। मगर उत्तर-पूर्व के भारतीय नागरिकों का ऐसे प्रदर्शनों से कोई लेना-देना नहीं होता। फिर भी सिर्फ इसलिए कि उनके नाक-नक्श तिब्बतियों से मिलते-जुलते हैं, उन्हें गड़बड़ी के संभावित स्रोत के रूप में चिह्नित किया गया, तो यह आपत्तिजनक है। उत्तर-पूर्व के निवासियों में यह शिकायत पहले से पैठी हुई है कि बाकी भारत में उनसे भेदभाव होता है। अहमदाबाद जैसी घटनाएं इस भावना को और गहरा बनाती हैं। अत: केंद्र को इस मामले में ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए, जो मिसाल बने और जिससे अपने देश के उन भागों में सही संदेश जाए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शी जिनपिंग की गुजरात यात्रा अपने पीछे विवाद छोड़ गई।
एक अन्य आरोप यह लगा है कि उस दौरान गुजरात सरकार द्वारा बांटे गए नक्शों में अक्साई चिन को चीन के हिस्से और अरुणाचल प्रदेश को विवादास्पद क्षेत्र के रूप में दिखाया गया। अगर यह गलती हुई तो जाहिर तौर पर इसके लिए राज्य सरकार के अधिकारी दोषी होंगे। अब यह गुजरात सरकार और केंद्र की जिम्मेदारी है कि इस मामले की सच्चाई का वे पता लगाएं और दोषी अफसरों पर कार्रवाई करें।चीन के राष्ट्रपति की यात्रा से भारत-चीन रिश्ते के प्रगाढ़ होने की आशा की गई थी। इस दौरान कारोबार के क्षेत्र में कई अहम समझौते हुए भी। मगर अनेक विवादों का साया भी इस पर पड़ा। नतीजतन, सद्भाव के बजाय कर्कशता अधिक उत्पन्न हुई है। इसके लिए खास तौर पर चीन ही दोषी है, जिसने शी जिनपिंग की यात्रा के साथ ही लद्दाख के चुमार क्षेत्र में घुसपैठ कर नया तनाव पैदा कर दिया। शी के जाने के बाद वहां हालात और बिगड़े हैं। इस बीच अहमदाबाद से आई खबरों ने और भी बदमजगी पैदा कर दी है। प्रभावी जांच और उचित कार्रवाई ही इसका समाधान है।
- नईदुनिया हिंदी दैनिक से साभार


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