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सेना के कूच की खबर से सरकार के शीर्ष नेतृत्व में मच गया था हड़कंप

नई दिल्ली। पूर्व आर्मी चीफ वीके सिंह और सरकार के बीच उम्र विवाद के दौरान 2012 में सेना के दिल्ली कूच की खबर से यूपीए सरकार घबरा गई थी। पिछले दिनों रिटायर हुए लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी ने यह चौंकाने वाला बयान दिया है। उधर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने इस बात को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि सरकार और सेना के बीच किसी प्रकार का अविश्वास नहीं था। उन्होंने कहा कि सरकार को कोई संदेह नहीं था। एक अंग्रेजी अखबार के साथ बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने कहा कि तब कुछ ऐसा जरूर था, जिसे लेकर सरकार कुछ चिंतित थी। हालांकि सेना का यह मात्र रूटीन अभ्यास था।

चौधरी के मुताबिक जनवरी 2012 में सेना की दो टुकड़ियां दिल्ली की ओर कूच कर गई थीं और इसे लेकर यूपीए सरकार के शीर्ष नेतृत्व में हड़कंप मच गया था। उन्होंने कहा कि 16 जनवरी को हिसार से सेना की टुकड़ी दिल्ली की ओर रवाना हुई थी। 19 जनवरी को रात करीब 11 बजे मुझे ऑफिस से फोन आया और जल्द आने को कहा गया। डिफेंस सेक्रेटरी ने मुझे बुलाया। मैंने आर्मी चीफ को इसकी सूचना दी। इसके बाद डिफेंस सेक्रेटरी से मिलने गया। डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि वह शीर्ष नेतृत्व से मिलकर आ रहे हैं और वे बेहद चिंतित हैं। चौधरी ने कहा कि उन्होंने मुझसे पूछा, बताइए क्या हो रहा है? मैंने कहा कि यह मात्र अभ्यास भर है और मैं उन्हें पहले ही रोकने और दूसरे मार्ग पर जाने के लिए कह चुका हूं। उन्होंने मुझसे कहा कि उन्हें जल्द वापस जाने को कहा जाए। मैंने उनसे कहा कि वे ड्रिल के मुताबिक वापस जाएंगे और उसका एक तरीका है, वे अभ्यास के बाद वापस चले जाएंगे।

वीके सिंह ने तख्तापलट की खबरों को हास्यास्पद बताया 
सेना की दो टुकड़ी की दिल्‍ली कूच को लेकर हालांकि ए के चौधरी ने अपने बयान को गलत बताया. इधर जनरल बी के सिंह ने खबर पर नाराजगी जाहिर की है. उन्‍होंने कहा कि खबर से मेरी छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है. उन्‍होंने तख्‍तापलट की खबर को हास्‍यास्‍पद बताया. जनरल चौधरी ने ये भी कहा है कि अगर दोनों यानी रक्षामंत्री और सेनाध्यक्ष के बीच ठीक से संवाद हुआ होता तो शायद ये घटना नहीं हुई होती. जनरल चौधरी का ये बयान दो साल बाद आया है.

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