बनबसा की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटकर्मियों ने 25 वर्षीय नेपाली विवाहिता को बचाया
बेंगुलुरू / बनबसा : शहर में नेपाली युवक की प्रताड़ना का शिकार हो रही एक नेपाली विवाहिता को बनबसा की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) ने सकुशल बचा लिया। इस विवाहिता को एक नेपाली युवक गायिका बनने का झांसा देकर बंगलूरू ले गया था। नेपाल के डडेलधुरा जिले की रहने वाली एक 25 वर्षीय विवाहिता कंचनपुर जिले के दैजी गांव निवासी सिद्धार्थ बिरई (28) के साथ फेसबुक के जरिए संपर्क में आई। सिद्धार्थ कार्यक्रमों और पार्टियों में गाने का काम करता है। नेपाली विवाहिता को भी गाने और नृत्य का शौक था। सिद्धार्थ उसे एलबम में काम दिलाने की बात कहकर अपने साथ बंगलूरू भगा ले गया। वहां सिद्धार्थ उसे प्रताड़ित करने लगा। कई बार उसने विवाहिता के साथ मारपीट भी की।
विवाहिता को जब पता चला कि सिद्धार्थ उसे बेचना चाहता है तो उसने भागने का प्रयास भी किया, किंतु असफल रही। एक दिन उसने मौका पाकर सिद्धार्थ का फोन लेकर नेपाल के कंचनपुर में रहने वाली अपनी बहन को आपबीती बताई। उसकी बहन ने बनबसा स्थित एएचटीयू से संपर्क किया। एएचटीयू प्रभारी एसआई मंजू पांडेय, मुन्ना सिंह और गणेश बिष्ट ने एक स्थानीय व्यक्ति को समझाबुझाकर और पैसे देकर विवाहिता की बहन के साथ बंगलूरू भेज दिया। वहां उन्होंने बंगलूरू पुलिस से संपर्क किया। बंगलूरू पुलिस ने बनबसा स्थित एएचटीयू से पूछताछ के बाद उनकी मदद की। एएचटीयू प्रभारी ने बताया कि बंगलूरू पुलिस की मदद से नेपाली विवाहिता बुधवार को बनबसा पहुंची। एएचटीयू कर्मियों ने उसे नेपाली संस्था माईते नेपाल और टाइनी हैंड्स के सुपुर्द कर दिया।
विवाहिता को जब पता चला कि सिद्धार्थ उसे बेचना चाहता है तो उसने भागने का प्रयास भी किया, किंतु असफल रही। एक दिन उसने मौका पाकर सिद्धार्थ का फोन लेकर नेपाल के कंचनपुर में रहने वाली अपनी बहन को आपबीती बताई। उसकी बहन ने बनबसा स्थित एएचटीयू से संपर्क किया। एएचटीयू प्रभारी एसआई मंजू पांडेय, मुन्ना सिंह और गणेश बिष्ट ने एक स्थानीय व्यक्ति को समझाबुझाकर और पैसे देकर विवाहिता की बहन के साथ बंगलूरू भेज दिया। वहां उन्होंने बंगलूरू पुलिस से संपर्क किया। बंगलूरू पुलिस ने बनबसा स्थित एएचटीयू से पूछताछ के बाद उनकी मदद की। एएचटीयू प्रभारी ने बताया कि बंगलूरू पुलिस की मदद से नेपाली विवाहिता बुधवार को बनबसा पहुंची। एएचटीयू कर्मियों ने उसे नेपाली संस्था माईते नेपाल और टाइनी हैंड्स के सुपुर्द कर दिया।


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