पहले थे नेता, अब हो गए ठेकेदार - प्रवीण गुरुंग
कालिम्पोंग। तराई-डुवार्स पीपल्स फोरम के सचिव प्रवीण गुरुंग ने कहा कि पहले अलग राज्य गोरखालैंड के गठन के लिए गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता आंदोलन करते थे, लेकिन जब से जीटीए का बिल विधानसभा में पारित हो गया है, यह नेता ठेकेदार की भूमिका में आ गए हैं। उन्हें भलि-भांति पता है कि इस व्यवस्था से पहाड़ के लोगों का कोई भला नहीं होगा और न ही गोरखाओं को पहचान मिलेगी। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बिजली बिल जमा करने को लेकर पिछले कुछ दिनों तक असमंजस की स्थिति थी। इस बीच प्रदेश सरकार ने आदेश जारी किया तो तस्वीर साफ हुई।ऐसा नहीं हुआ होता तो अभी तक यह हालत बनी रहती। अब जीटीए में चुनाव कराने की जल्दीबाजी हो रही है। तराई-डुवार्स की जनता के साथ फिर धोखा हुआ है। आंदोलन के दौरान यहां के कई लोग शहीद हुए और कई लोगों के आशियाने जला दिए गए, लेकिन इसकी अनदेखी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जीटीए में अस्थायी कर्मचारियों का भी भविष्य अंधकार में है। भले ही उनके लिए इस समय नेता कुछ भी बयान दें, लेकिन होना कुछ नहीं है। जीटीए से अच्छी व्यवस्था छठी अनुसूची थी। इसका विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गोजमुमो ईमानदार है तो जीटीए में तराई-डुवार्स को चुनाव से पहले शामिल कराए।

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