जीजेएम ने फिर दोहराया गोरखालैंड : आखिर चाहता क्या है मोर्चा ?
दार्जिलिंग : एक ओर पश्चिम बंगाल और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के बीच रविवार को हुआ सुलह तब धरा का धरा दिखा जब मोर्चा ने एक बार फिर से गोरखालैंड की मांग दोहरा दी। जीजेएम के साथ बातचीत के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि 'गोरखालैंड का मुद्दा पाठ्यक्रम से बाहर जा चुका है' और दार्जिलिंग के विकास के लिए संयुक्त रूप से काम करने पर जोर दिया था।
इसके महज दो दिनों बाद रविवार को जीजेएम प्रमुख बिमल गुरुंग ने राज्य सरकार के रुख पर सवाल उठाया और कहा कि उनकी पार्टी गोरखालैंड के लिए नई दिल्ली पर दबाव डालेगी। गुरुंग ने कहा, "जीजेएम गोरखालैंड की मांग से पीछे नहीं हटेगा। जब केंद्र तेलंगाना की मांग स्वीकार कर सकता है तो हम क्यों नहीं पृथक राज्य की मांग कर सकते हैं? अब हम 21,22 और 23 दिसंबर को नई दिल्ली से गोरखालैंड की मांग करेंगे। अब हम दिल्ली में दबाव पैदा करेंगे।" आखिरकार इस सब घटनाक्रम के बीच मोर्चा क्या चाहता है ? इसका जवाब उसे पहाड़ की जनता को स्पष्ट रूप से देना होगा। एक तरफ ममता के गल्बाहे करके उनके साथ एक मंच पर खड़े होकर "गोरखालैंड" की मांग क्या उचित है ?


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