हमले से डरे नेपाली पुलिसकर्मियों को भारत में लेनी पड़ी शरण
नई दिल्ली। नेपाल के पुलिसकर्मियों को हाल ही में देश में उत्पन्न असामान्य स्थिति के दौरान सीमा पार कर भारत में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के पास शरण लेनी पड़ी। नेपाल में हिंसा और वर्दीधारी को देखते होने वाले हमले से डरे तीन दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों को सीमा पार करना पड़ा था। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की लगातार निगरानी में भारतीय पक्ष ने अपनी भूमिका निभाई। नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को कुछ दिनों तक एसएसबी के पोस्टों में शरण दी गई।
प्रस्तावित संविधान के विरोध में प्रदर्शन कर रहे मधेशी समूह ने भारतीय सीमा से सटे दो शहरों में असहज स्थिति पैदा कर दी। बारा जिले में चंद्रमोहना, सनफुलवा, देवापुर की सीमा चौकी को बंद करना पड़ा। एसएसबी ने शरण लेने वाले पुलिस अधिकारियों को न केवल सुरक्षा दी, बल्कि उन्हें भोजन और अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई। इन पुलिसकर्मियों ने बिहार में रक्सौल और पिपराकोठी और अन्य स्थानों पर शरण ली थी। तेजी से बदलती परिस्थिति में एसएसबी के महानिदेशक बीडी शर्मा ने एपीएफ के चीफ कोश राज ओंटा के साथ हॉटलाइन पर संपर्क साधा। शर्मा ने ओंटा को बताया कि संकट के समय नेपाली पुलिसकर्मियों को बेहतर तरीके से ठहराया गया है। एसएसबी से नेपाल पुलिस ने अपने यहां गड़बड़ी रोकने के लिए सीमा पार करने वाले समूहों पर नजर रखने का आग्रह किया है।
प्रस्तावित संविधान के विरोध में प्रदर्शन कर रहे मधेशी समूह ने भारतीय सीमा से सटे दो शहरों में असहज स्थिति पैदा कर दी। बारा जिले में चंद्रमोहना, सनफुलवा, देवापुर की सीमा चौकी को बंद करना पड़ा। एसएसबी ने शरण लेने वाले पुलिस अधिकारियों को न केवल सुरक्षा दी, बल्कि उन्हें भोजन और अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई। इन पुलिसकर्मियों ने बिहार में रक्सौल और पिपराकोठी और अन्य स्थानों पर शरण ली थी। तेजी से बदलती परिस्थिति में एसएसबी के महानिदेशक बीडी शर्मा ने एपीएफ के चीफ कोश राज ओंटा के साथ हॉटलाइन पर संपर्क साधा। शर्मा ने ओंटा को बताया कि संकट के समय नेपाली पुलिसकर्मियों को बेहतर तरीके से ठहराया गया है। एसएसबी से नेपाल पुलिस ने अपने यहां गड़बड़ी रोकने के लिए सीमा पार करने वाले समूहों पर नजर रखने का आग्रह किया है।


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