प्रचंड ने नेपाल में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पेश की, दूसरी बार होगी ताजपोशी
काठमांडू : प्रचंड के नाम से विख्यात कम्युनिस्टी पार्टी ऑफ नेपाल माओवादी सेंटर (सीपीएन-एम-एस)के प्रमुख पुष्प कमल दहाल ने मंगलवार को आधिकारिक रूप से देश के प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पेश की। नेपाली कांग्रेस के समर्थन के मद्देनजर उनका प्रधानमंत्री बनना तय है। हालांकि, बुधवार को औपचारिक रूप से इसपर संसद में मतदान होगा। संसद में मंगलवार को नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुरी देउबा ने 61 वर्षीय प्रचंड का नाम को प्रधानमंत्री के तौर पर प्रस्तावित किया। उनके इस प्रस्ताव का समर्थन माओवादी नेता कृष्ण बहादुर महारा ने किया। प्रचंड का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि उनकी दावेदारी का समर्थन नेपाली कांग्रेस के साथ-साथ मधेसी पार्टियां और अन्य छोटे दल कर रहे हैं।
राष्ट्रपति की नई मियाद के बाद पहल
प्रचंड की दावेदारी राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी द्वारा सरकार बनाने के लिए नए सिरे से पार्टियों का आहवान करने के बाद आया है। इससे पहले राष्ट्रपति ने केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद दलों से नई सरकार के लिए दावेदारी पेश करने को कहा था। लेकिन मियाद पूरी होने के बावजूद कोई भी दल सामने नहीं आया।
दूसरी बार होगी ताजपोशी
- 39 वें प्रधानमंत्री होंगे दहाल अगर संसद उनकी पुष्टि कर देती है, पहले भी वह यह पद संभाल चुके हैं
- 18 अगस्त 2008 से 25 मई 2009 तक नेपाल के 33 वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था
- 4 मई 2009 को सेना प्रमुख रुकमुंड कटवाल को हटाने को लेकर तत्कालीन राष्ट्रपति से तकरार के बाद छोड़ा पद
भारत विरोधी रुख पहचान
- प्रचंड को भारत के खिलाफ और चीन के अधिक करीब माना जाता है
- उन्होंने 1950 में हुए भारत-नेपाल समझौते की समीक्षा की मांग की
- 2015 के मधेसी संकट में भी भारत की भूमिका होने का लगाया आरोप
राष्ट्रपति की नई मियाद के बाद पहल
प्रचंड की दावेदारी राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी द्वारा सरकार बनाने के लिए नए सिरे से पार्टियों का आहवान करने के बाद आया है। इससे पहले राष्ट्रपति ने केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद दलों से नई सरकार के लिए दावेदारी पेश करने को कहा था। लेकिन मियाद पूरी होने के बावजूद कोई भी दल सामने नहीं आया।
दूसरी बार होगी ताजपोशी
- 39 वें प्रधानमंत्री होंगे दहाल अगर संसद उनकी पुष्टि कर देती है, पहले भी वह यह पद संभाल चुके हैं
- 18 अगस्त 2008 से 25 मई 2009 तक नेपाल के 33 वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था
- 4 मई 2009 को सेना प्रमुख रुकमुंड कटवाल को हटाने को लेकर तत्कालीन राष्ट्रपति से तकरार के बाद छोड़ा पद
भारत विरोधी रुख पहचान
- प्रचंड को भारत के खिलाफ और चीन के अधिक करीब माना जाता है
- उन्होंने 1950 में हुए भारत-नेपाल समझौते की समीक्षा की मांग की
- 2015 के मधेसी संकट में भी भारत की भूमिका होने का लगाया आरोप


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