टाइगर हिल्स में निर्माण के विरोध में GTA ने खोला राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा, पहाड़ बंद करने की धमकी
दार्जिलिंग : राज्य सरकार की ओर से टाइगर हिल्स में बन रहे सरकारी योजनाओं का विरोध पहले से ही जारी है। ऐसे में गोजमुमो अर्थात जीटीए ने भी राज्य सरकार के निर्माण के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव देव को पत्र देकर जल्द से जल्द एक सप्ताह के भीतर सुनवाई करने के लिए कहा है। इसके साथ-साथ जीटीए ने धमकी दी है कि अगर एक सप्ताह के भीतर सुनवाई नहीं होता है तो वे लोग सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं। साथ ही पहाड़ में 24 घंटे का बंद पालन करेंगे।
GTA की जमीन पर बिना पूछे कैसे हो रहा है निर्माण कार्य : विनय
गुरूवार को जीटीए के सूचना व सांस्कृतिक विभाग के कार्यकारी सभासद विनय तमांग ने पत्रकारों को यह जानकारी देते हुए कहा कि जीटीए प्रमुख विमल गुरूंग ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व केन्द्रीय राज्य मंत्री व सांसद एस एस अहलूवालिया को पत्र लिखकर जल्द से जल्द टाइगर हिल्स में निर्माण कार्य बंद कराने को कहा है। निर्माण कार्य बंद नहीं होने से 24 घंटा पहाड़ बंद एवं सुप्रीम कोर्ट जाने की धमकी दी है। विनय तमांग ने कहा कि जीटीए के अधीन भूमि में निर्माण कार्य कैसे हो रहा है। गत 16 मई 2013 मे गोरखा रंग मंच भवन में मुख्यमंत्री ने गोल्फ कोर्स बनाने के लिए योजना का शिलान्यास किया था। जिसमें जीटीए से 27 करोड़ 92 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। लेकिन वन विभाग की आपत्ति से यह काम शुरू नहीं हो सका।
समाधान न मिलने पर पहाड़ बंद करने की धमकी
गौरतलब है कि टाइगर हिल्स में निर्माण का विरोध केवल गैर सरकारी संस्था ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों से लेकर संघ, संस्था, राजनीतिक पार्टी व वरिष्ठ लोग भी कर रहे है। लोगों का कहना है कि तीर्थ स्थल है। साथ ही औषधी का संगम है। इस टाइगर हिल्स से कंचनजंघा व एवरेस्ट की चोटी के सूर्योदय को आसानी से देखा जा सकता है। यहां के जलस्त्रोत से पूरे दार्जिलिंग में पेयजल की व्यवस्था की जाती है। साथ ही यह एक ऐतिहासिक स्थल है। टाइगर हिल्स अंग्रेजों के शासनकाल में 1916 साल में बना। लेकिन वर्तमान में राज्य सरकार की ओर से वहां पर 40 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटन स्थल के साथ मुख्यमंत्री के काटेज बनाया जा रहा है। यह निर्माण कार्य राज्य सरकार के पर्यटन मंत्रालय की ओर से किया जा रहा है।
क्यों हो रहा है टाइगर हिल में निर्माण कार्य का विरोध
मालूम हो कि आखिरकार टाइगर हिल में निर्माण कार्य का विरोध क्यों हो रहा है। इस स्थान का महत्व क्या है। यह टाइगर धार्मिक स्थल के साथ सूर्योदय देखने का असली जगह है। यहां पर औषधी के पौधे के घने जंगल के साथ जलस्त्रोत है। यहां से पानी एकत्रित करके इसका स्त्रोत बनाकर इसके जल भंडार से पूरे शहर में पेयजल की आपूर्ति होती है। हालांकि इससे पहले दागोपाप के समय में भी यहां पर हेलीपैड व गोल्प कोर्स बनाने की मांग उठी थी। बाद में इसका विरोध किए जाने पर उसे बंद कर दिया गया था। बता दें कि मुख्यमंत्री पहाड़ की ओर से विशेष ध्यान दे रही है। वहां पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रयास से चले रहे हट ट्यूरिज्म स्पॉट के निर्माण कार्य चल रहा है। टाइगर हिल में हट ट्यूरिस्ट स्पॉट बने। जहां पर देश व विदेश से आए हुए सैलानियों को सुबह के सूर्य के दर्शन होने में कोई दिक्कतें न हो। इसलिए टाइगर हिल में ट्यूरिज्म लॉज का निर्माण कराया जा रहा है।
GTA की जमीन पर बिना पूछे कैसे हो रहा है निर्माण कार्य : विनय
गुरूवार को जीटीए के सूचना व सांस्कृतिक विभाग के कार्यकारी सभासद विनय तमांग ने पत्रकारों को यह जानकारी देते हुए कहा कि जीटीए प्रमुख विमल गुरूंग ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व केन्द्रीय राज्य मंत्री व सांसद एस एस अहलूवालिया को पत्र लिखकर जल्द से जल्द टाइगर हिल्स में निर्माण कार्य बंद कराने को कहा है। निर्माण कार्य बंद नहीं होने से 24 घंटा पहाड़ बंद एवं सुप्रीम कोर्ट जाने की धमकी दी है। विनय तमांग ने कहा कि जीटीए के अधीन भूमि में निर्माण कार्य कैसे हो रहा है। गत 16 मई 2013 मे गोरखा रंग मंच भवन में मुख्यमंत्री ने गोल्फ कोर्स बनाने के लिए योजना का शिलान्यास किया था। जिसमें जीटीए से 27 करोड़ 92 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। लेकिन वन विभाग की आपत्ति से यह काम शुरू नहीं हो सका।
समाधान न मिलने पर पहाड़ बंद करने की धमकी
गौरतलब है कि टाइगर हिल्स में निर्माण का विरोध केवल गैर सरकारी संस्था ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों से लेकर संघ, संस्था, राजनीतिक पार्टी व वरिष्ठ लोग भी कर रहे है। लोगों का कहना है कि तीर्थ स्थल है। साथ ही औषधी का संगम है। इस टाइगर हिल्स से कंचनजंघा व एवरेस्ट की चोटी के सूर्योदय को आसानी से देखा जा सकता है। यहां के जलस्त्रोत से पूरे दार्जिलिंग में पेयजल की व्यवस्था की जाती है। साथ ही यह एक ऐतिहासिक स्थल है। टाइगर हिल्स अंग्रेजों के शासनकाल में 1916 साल में बना। लेकिन वर्तमान में राज्य सरकार की ओर से वहां पर 40 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटन स्थल के साथ मुख्यमंत्री के काटेज बनाया जा रहा है। यह निर्माण कार्य राज्य सरकार के पर्यटन मंत्रालय की ओर से किया जा रहा है।
क्यों हो रहा है टाइगर हिल में निर्माण कार्य का विरोध
मालूम हो कि आखिरकार टाइगर हिल में निर्माण कार्य का विरोध क्यों हो रहा है। इस स्थान का महत्व क्या है। यह टाइगर धार्मिक स्थल के साथ सूर्योदय देखने का असली जगह है। यहां पर औषधी के पौधे के घने जंगल के साथ जलस्त्रोत है। यहां से पानी एकत्रित करके इसका स्त्रोत बनाकर इसके जल भंडार से पूरे शहर में पेयजल की आपूर्ति होती है। हालांकि इससे पहले दागोपाप के समय में भी यहां पर हेलीपैड व गोल्प कोर्स बनाने की मांग उठी थी। बाद में इसका विरोध किए जाने पर उसे बंद कर दिया गया था। बता दें कि मुख्यमंत्री पहाड़ की ओर से विशेष ध्यान दे रही है। वहां पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रयास से चले रहे हट ट्यूरिज्म स्पॉट के निर्माण कार्य चल रहा है। टाइगर हिल में हट ट्यूरिस्ट स्पॉट बने। जहां पर देश व विदेश से आए हुए सैलानियों को सुबह के सूर्य के दर्शन होने में कोई दिक्कतें न हो। इसलिए टाइगर हिल में ट्यूरिज्म लॉज का निर्माण कराया जा रहा है।


Post a Comment