GNLF ने 37वें स्थापना दिवस पर छठी अनुसूची को छोड़, उठाया पृथक गोरखालैंड राज्य का मुद्दा
दार्जिलिंग : गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (GNLF) के 37वें स्थापना दिवस पर पार्टी सदस्यों ने छठी अनुसूची की मांग को पीछे रखकर अलग राज्य गोरखालैंड की मांग की है। आज चौक बाजार के गोतांग डांडा में एक जनसभा का आयोजन किया गया था। युवा नेता वाइ लामा ने अपने पिता सुभाष घीसिंग को राजनैतिक हक दिलाने वाला नेता बताया। लेकिन कुछ लोगों ने उसे अपमानित करने का काम किया। अपने भाषण के दौरान वाइ लामा ने फिर से गोरखालैंड की मांग रखी। उन्होंने पहाड़ में बिगड़ते कानूनी व्यवस्था के लिए भारत सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि केंद्र पहाड़ी लोगों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं बढ़ा रही है। गोरखाओं ने नींद में नहीं बल्कि रणभूमि में लड़कर गोरखालैंड का सपना देखा था।
उन्होंने आगे कहा कि बार-बार आश्वासन दिलाने के बाद भी अलग राज्य के लिए केंद्र सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की। दूसरी ओर विमल गुरुंग पर निशाने साधते हुए कहा कि गोरखालैंड की मांग करने वाली पार्टी अब जीटीए तक सिमट कर रह गई है। केवल पैसे के पीछे दौड़ धूप करने में लगे रहते हैं। दूसरे नेता संदीप राई ने कहा कि सभी युवाओं को एक होकर अब GNLF का साथ देना चाहिए। छठी अनुसूची संविधान के दायरे में है, जबकि जीटीए असंवैधानिक है।
1980 को सुभाष घीसिंग ने किया था GNLF का गठन
गौरतलब है कि 5 अप्रैल 1980 को सुभाष घीसिंग ने GNLF का गठन किया था। गोरखालैंड के लिए आवाज उठाने वाले प्रथम व्यक्ति थे। लेकिन पार्टी को सहयोग नहीं मिलने से वर्ष 1986 में आंदोलन शुरू हुआ था। 28 महीने के आंदोलन के बाद दार्जिलिंग पार्वत्य परिषद का गठन हुआ।
1980 को सुभाष घीसिंग ने किया था GNLF का गठन
गौरतलब है कि 5 अप्रैल 1980 को सुभाष घीसिंग ने GNLF का गठन किया था। गोरखालैंड के लिए आवाज उठाने वाले प्रथम व्यक्ति थे। लेकिन पार्टी को सहयोग नहीं मिलने से वर्ष 1986 में आंदोलन शुरू हुआ था। 28 महीने के आंदोलन के बाद दार्जिलिंग पार्वत्य परिषद का गठन हुआ।


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