भारतीय सेना में फर्जी दस्तावेज के सहारे नेपाली युवकों की भर्ती के मामले में ATS ने किया 3 जालसाजों को गिरफ्तार
वाराणसी/लखनऊ : भारतीय सेना में फर्जी दस्तावेज के सहारे नेपाली युवकों की भर्ती के मामले में एटीएस ने कचहरी इलाके से तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है। फोटोस्टेट व कंप्यूटर सेंटर की आड़ में तीनों फर्जी दस्तावेज तैयार करने का गोरखधंधा चला रहे थे। एटीएस को मौके से 21 फर्जी मार्कशीट मिली है। कैंट थाने में पूछताछ के बाद जालसाजों को लखनऊ ले जाया जाएगा। सेना में फर्जी तरीके से भर्ती के मामले में बीते सोमवार को वाराणसी के सदर बाजार इलाके में एटीएस के हत्थे चढ़े नेपाल निवासी दिलीप गिरि ने पूछताछ में चंद्र बहादुर का नाम उगला था। 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर वाराणसी से गोरखा राइफल्स में चंद्र बहादुर के जरिए नेपाली युवकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भर्ती कराया गया था। एटीएस ने उसे भी वाराणसी के सदर बाजार क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। लखनऊ की अदालत में दोनों को पेश करने के बाद एटीएस ने दोनों को कस्टडी रिमांड पर लिया था। पूछताछ में उन्होंने फर्जी मार्कशीट तैयार करने वाले साथियों के नाम बताए।
लखनऊ एटीएस के एसआइ धीरेंद्र ठाकुर व विजयमल यादव के नेतृत्व में टीम वाराणसी पहुंची। कचहरी चौकी प्रभारी सदानंद राय के साथ एटीएस ने कचहरी चौकी के समीप एक कम्यूनिकेशन सेंटर पर छापेमारी कर मौके से संचालक नागेश मौर्य निवासी शिवपुर व दो कर्मचारी अवध प्रकाश निवासी कमौली चौबेपुर व बक्सर, बिहार के मूल निवासी अजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया। दुकान की तलाशी में मौके से हाईस्कूल - इंटर की 70 मार्कशीट मिली। इसके बाद एटीएस बरामद मार्कशीटों के सत्यापन को बोर्ड आफिस पहुंची। देर शाम तक 21 मार्कशीट की जांच हुई। जांच में सभी 21 मार्कशीट फर्जी निकले। कचहरी चौकी प्रभारी सदानंद राय ने बताया कि शिवपुर निवासी नागेश मौर्य फोटोस्टेट व जॉब वर्क की आड़ में फर्जी दस्तावेज तैयार करने का धंधा कर रहा था। पुलिस को मौके से स्कूल - कालेज की मुहरें, जिला विद्यालय निरीक्षक आजमगढ़ की मुहर, 32900 रुपये, कलर प्रिंटर, पेन ड्राइव, लैपटाप बरामद हुए हैं।
बर्खास्त सिपाही के संरक्षण में होता था फर्जी दस्तावेज तैयार -
नेपाल के बागलोन जिले के थाना हटिया के ग्राम गलकोट निवासी चंद्र बहादुर खत्री वाराणसी के सदर बाजार क्षेत्र में रह रहा था। चंद्र बहादुर वर्ष 1982 में गोरखपुर से गोरखा रेजीमेंट में भर्ती हुआ था। वर्ष 1991 में चंद्र बहादुर को सेना से बर्खास्त कर दिया गया था। बर्खास्तगी के बाद चंद्र बहादुर छावनी के आसपास किराए के मकान लेकर रह रहा था। नेपाल से सेना में भर्ती होने आने वाले युवक चंद्र बहादुर के खास निशाने पर होते थे। इस दौरान उसकी बिहार के बक्सर जिला के मूल निवासी व शिवपुर के साईधाम क्षेत्र में किराये पर रहने वाले अजय सिंह को अपना शागिर्द बनाया। अजय सिंह के जरिए नागेश व अवध प्रकाश संपर्क में आए। नागेश ने कचहरी इलाके में कंप्यूटर सेंटर खोला जहां फोटोस्टेट से लेकर कंप्यूटर टाइपिंग, जॉब वर्क होता था। चंद्रबहादुर के इशारे पर नागेश की निगरानी में अवध प्रकाश फर्जी मार्कशीट तैयार करता था। चंद्र बहादुर से एक मार्कशीट तैयार कराने के एवज में अजय को 15सौ रुपये मिलते थे जबकि अवध प्रकाश को तीन सौ रुपये।
पहले भी जा चुका है जेल -
फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के एवज में नेपाली युवकों से 10 लाख रुपये तक वसूलने वाला चंद्र बहादुर इससे पूर्व वर्ष 2010 में वाराणसी में ही फर्जी दस्तावेज बनाने के मामले में जेल जा चुका है। तब उसे वाराणसी के चेतगंज थाने की पुलिस ने गिरफ्तार किया था। चंद्र बहादुर के खिलाफ चेतगंज थाने में फर्जी दस्तावेज बनाने व आर्म्स एक्ट के तहत दो मुकदमे दर्ज हैं।
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