पहाड़ के बुद्घिजीवी बन गए जिंदा लाश - प्रताप खाती
कालिम्पोंग। अखिल भारतीय गोरखालीग के नेता प्रताप खाती ने आरोप लगाया कि पहाड़ के सभी बुद्धिजीवी जिंदा लाश हो गए हैं। अलग राज्य गोरखालैंड का गठन कराने के नाम पर जीटीए के साथ जाने वाले नेताओं का वह साथ दे रहे हैं। गोरखाओं के अहित को वह स्वीकार नहीं कर रहे हैं और इसका आने वाले भविष्य में उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ेगा। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि गोजमुमो ने लोगों से कहा था कि वह गोरखालैंड से कम किसी भी चीज पर समझौता नहीं करेगा और अब हालत यह हो गई है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बंग भंग नहीं करने के बयान के बावजूद वह अपना राग अलाप रहा है।इस दल के नेताओं की हालत यह हो गई है कि वह सरकार की मंशा को अब तक समझ नहीं पाए हैं या समझना नहीं चाहते हैं। सरकार को जीटीए में तराई-डुवार्स को शामिल करना होता तो वह पहले ही इसकी घोषणा कर देती, लेकिन उच्चस्तरीय समिति बनाई गई। इसका कोई परिणाम नहीं निकलेगा और यह बात सभी को पता है। पहाड़ के लोगों के साथ धोखा हुआ है और इसका तमाशा पूरा बुद्धिजीवियों का वर्ग देख रहा है। इस स्थिति को सुधारा नहीं गया तो हिल्स के लोगों का भविष्य खराब होना तय है। पहाड़ के विकास के नाम पर लोगों के पहचान के साथ खिलवाड़ होना तय है। ऐसे में जरूरत है कि सभी लोग इस मुद्दे पर एकमत हों और गोरखालैंड के लिए संघर्ष करें।

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