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असम राइफल्स के पहले भारतीय प्रमुख कर्नल सिद्धिमान राई : भारतीय सैन्य इतिहास के दबंग गोरखा अफसर

दीपक राई 
वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क 

कर्नल सिद्धिमान राई का नाम भारतीय सैन्य इतिहास और पूर्वोत्तर भारत के सुरक्षा ढाँचे में बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है। वे स्वतंत्रता के बाद असम के पहले महानिदेशक (तब Inspector General) थे और वह ऐतिहासिक रूप से असम राइफल्स के पहले गैर-ब्रिटिश महानिदेशक के रूप में भी शुमार किए जाते है। 

असम राइफल्स भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है। आज भी इसकी प्रशासनिक व्यवस्था अनोखी है - प्रशासनिक नियंत्रण गृह मंत्रालय के पास है, जबकि ऑपरेशनल नियंत्रण रक्षा मंत्रालय के पास। ऐसे जटिल बल को स्वतंत्रता के ठीक बाद संभालने की जिम्मेदारी कर्नल राई को दी गई, जो उनके नेतृत्व और अंग्रेजों द्वारा भी स्वीकृत वीरता का प्रमाण था।

{ सैन्य पृष्ठभूमि और सम्मान }

4 अप्रैल 1900 (आसपास) जन्में कर्नल सिद्धिमान राई ने अपनी सैन्य सेवा की शुरुआत गोरखा ब्रिगेड के बॉयज से की। जिसमें वह 27 मार्च 1916 को भर्ती हुए। उसके बाद वह 10वीं गोरखा राइफल्स की प्रथम बटालियन में बतौर रंगरूट सैनिक बने। 1924 में लांस नायक से सफर शुरू करते हुए अंततः वह देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से कमीशन लेकर बतौर सैकंड लेफ्टिनेंट असम राइफल्स में शामिल हुए। वह IMA से कमीशन प्राप्त करने वाले पहले गोर्खाली कमीशन अफसर भी थे। कर्नल राई को मिलिट्री क्रॉस (MC) से सम्मानित किया गया था, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के खिलाफ 1939 को असाधारण वीरता के लिए ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा दिया जाने वाला एक बड़ा सम्मान था। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने ब्रिटिश इंडियन आर्मी में रहते हुए युद्ध के मोर्चे पर साहस दिखाया था। वे गोरखा रेजिमेंट से जुड़े थे, जो अपनी "वीरता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा" के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

{ स्वतंत्रता के बाद पहला का सैन्य करियर }

1947 में स्वतंत्रता के बाद, पूरे देश में अंग्रेज अधिकारियों की जगह भारतीय अधिकारियों को लेना सबसे बड़ी चुनौती थी। पूर्वोत्तर, विशेषकर असम, नागालैंड और मणिपुर का क्षेत्र उस समय विद्रोह और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था। इस समय असम पुलिस और असम राइफल्स के प्रमुख के तौर पर कर्नल सिद्धिमान राई की नियुक्ति हुई। कर्नल राई ने असम राइफल्स की बागडोर 15 अगस्त 1948 से 10 दिसंबर 1949 तक संभाली। आज भी भारतीय पाठ्यक्रम और राज्य सेवा परीक्षाओं में पढ़ाया जाता है कि "The first Director General of Assam post independence was Colonel Siddhiman Rai'। उन्होंने एक ब्रिटिश-शैली के पुलिस बल को एक भारतीय, जनता के प्रति जवाबदेह बल में बदलने की नींव रखी। कर्नल राई 1955 को सेवानिवृत्त हुए।

{ पारिवारिक विरासत - फौजी परम्परा }

देहरादून के निवासी कर्नल सिद्धिमान राई का परिवार भी भारतीय सेना की परम्परा को आगे ले गया। उनके बड़े बेटे मेजर धर्म समशेर राई ने भी असम रेजिमेंट में कंपनी कमांडर के रूप में सेवा की। उनके छोटे बेटे केएस राई भी भारतीय नौसेना से नेवल कोमोडोर के पद से सेवानिवृत्त हुए। इस तरह कर्नल राई परिवार गोरखा समुदाय में सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है ।

{ सामाजिक स्मृति में कर्नल राई }

देहरादून की माटी से मोहब्बत होने के कारण कर्नल राई अपनी सैन्य सेवा के पश्चात 1955 को रिटायर होने के बाद देहरादून आकर बस गए। उन्होंने प्रतिष्ठित गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष के रूप में 21 जनवरी 1963 से 15 फरवरी 1964 तक सामाजिक उत्थान के लिए कार्य किया। वहीं आज कोलकाता में सिद्धिमान राई मेमोरियल ग्राउंड वेलफेयर सोसाइटी जैसे संगठन उनके नाम पर सामाजिक कार्य कर रहे हैं, जो दर्शाता है कि एक सैन्य अधिकारी के रूप में उनका सम्मान केवल सेना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में भी जीवित है।

कर्नल सिद्धिमान राई सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं जिसने ब्रिटिश राज से भारतीय राज में सुरक्षा व्यवस्था के बेहद अहम् ज़िम्मेदारी को अपने कंधों पर शानदार और सफलतापूर्वक संभाला।

वे पहले भारतीय थे जिन्होंने पूर्वोत्तर जैसे संवेदनशील सीमांत राज्यों की कमान संभाली। उन्होंने गोरखा समुदाय को यह दिखाया कि वीरता के साथ-साथ प्रशासनिक नेतृत्व भी उनका क्षेत्र है। उनका मिलिट्री क्रॉस सैन्य सम्मान और असम राइफल्स के IG (वर्तमान मर DG) के रूप में कार्यकाल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

वीर गोरखा न्यूज़ नेटवर्क के माध्यम से ऐसे नायकों की कहानियों को सामने लाया जाता रहा है,जो हमारे वर्तमान को अपने भूतकाल के अनकहे गौरव गाथा और ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत कराने के लिए बहुत जरूरी है, ताकि हमारी नई पीढ़ी अपने इतिहास को केवल युद्धों के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के रूप में भी समझ सके।

( देहरादून के वरिष्ठ साहित्यकार/इतिहासकार उदय ठाकुर का तथ्यात्मक जानकारी साझा करने के लिए विशेष आभार)

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