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नेपाल के मामलों में चीन का राजनीतिक दखल, सरकार बनाने का सुझाव

काठमांडू। चीन ने नेपाल के राजनीतिक दलों से गतिरोध को समाप्त कर संविधान निर्माण के लिए एकजुट हो जाने की अपील की है। चीन में सत्तारूढ़ सीपीसी पार्टी के विदेशी मामलों की इकाई के उपाध्यक्ष एई पिंग ने यहां की सभी बड़े दलों के नेताओं से मुलाकात की। सबसे पहले पिंग नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष सुशील कोइराला से मिले इसके बाद उन्होंन मुख्य माओवादी नेता प्रचंड और सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष झालानाथ खनल से भी मुलाकात की। सभी नेताओं से विचार विमर्श के बाद पिंग ने कहा कि नेपाल के इन राजनैतिक दलों को सबसे पहले नए संविधान को तैयार करने के मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए ताकि लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक गतिरोध समाप्त किया जा सके।

पिंग ने कोइराला से बातचीत में कहा कि उन्हें गठबंधन सरकार बनाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि नया संविधान तैयार करने की दिशा में प्रगति हो सके। प्रचंड से मुलाकात में पिंग ने कहा कि उन्हें चुनाव परिणामों को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेपाली जनता ने राजनीतिक दलों को आगे बढ़ने के लिए जनमत प्रदान किया है। यहां ज्ञात रहे कि नेपाल में चुनाव परिणामों को आए काफी वक्त हो चुका है लेकिन वहां अब तक संविधान सभा का गठन नहीं हो सका है। माओवादी नेता प्रचंड और उनके सहयोगी दल इस राह में रोढ़े अटका रहे हैं। चीनी नेता के साथ एक 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी नेपाल आया है।
 
चीन की नेपाल में बढ़ती रूचि 
यहां ज्ञात रहे कि इससे पहले जून में चीन ने नेपाल के चुनाव आयोग को करीब 15 करोड़ नेपाली रूपए की तकनीकी मदद दी थी। इसके अलावा भी दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग के तीन समझौते किए गए थे। चीन नेपाल को हर साल 3 अरब 15 करोड़ नेपाली रूपए की आर्थिक सहायता भी दे रहा है। इतना ही नहीं चीन ने नेपाली सेना को दो मोबाइल हॉस्पिटल बनाने के लिए 82 लाख डॉलर अनुदान भी दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन का नेपाल के आर्थिक और राजनीतिक मामलों में बढ़ता दखल भारत का इस देश में प्रभुत्व कम कर सकता है।

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