अनित थापा ने PM मोदी - बिमल गुरुंग पर कसा तंज, भाजपा और सांसद अहलूवालिया की जमकर आलोचना
दार्जिलिंग : गोजमुमो के विनय गुट ने यह दावा किया है कि राज्य सरकार से केंद्र पर त्रिपक्षीय वार्ता बुलाने के लिये दबाव बनाने के लिये कहा गया है. ऐसा दावा गोजमुमो विनय गुट की केंद्रीय कमेटी के मुख्य सलाहकार लेकमान लामा ने बलिदान दिवस के मौके पर नागराकाटा के शिप्चू में किया है. वहीं, विनय गुट के महासचिव अनित थापा ने प्रेस बयान जारी कर जीटीए के पूर्व चीफ पर निशाना साधते हुए कहा है कि विमल गुरुंग और रोशन गिरि गोरखा समुदाय के हितों के लिये नहीं बल्कि अपने निजी स्वार्थ के लिये दिल्ली में हैं. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि सच में उन्हें लगता है कि उन्होंने गोरखालैंड राज्य के लिये काम किया है तो वे अभी तक के अपने काम काज का हिसाब जनता के समक्ष रखें. बयान में अनित थापा ने कहा कि वास्तव में ये दोनों नेता खुद को कानूनी मामलों में फंसने से बचाने के लिये दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं.
अनित ने कहा कि विमल गुरुंग की कथनी व करनी में फर्क का इससे बड़ा क्या सबूत हो सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में अपने बजटीय भाषण में पांच घंटे तक विभन्न छोटे छोटे राज्यों के साथ तेलंगाना राज्य तक की चर्चा की. लेकिन उन्होंने एक बार भी गोरखालैंड या गोरखा समुदाय का जिक्र नहीं किया. दरअसल, भाजपा ने हमेशा ही गोरखालैंड और गोरखा समुदाय का इस्तेमाल वोट बैंक में किया है. उसे गोरखालैंड और गोरखा समुदाय के हितों से कोई लेना देना नहीं है. आंदोलन के दौरान सांसद एसएस अहलूवालिया और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने एक बार भी कार्यकर्ताओं से मिलने की जहमत नहीं उठायी.
सच्चाई यही है कि जब विमल गुरुंग सिक्किम के आलीशान बंगले में और रोशन गिरी दिल्ली के सुरक्षित गलियारों में पनाह लिये हुए थे, उस समय 104 दिनी गोरखालैंड आंदोलन के दौरान जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ विनय तमांग ही खड़े थे. यहां तक कि आंदोलन में गिरफ्तार गोजमुमो के प्रमुख नेता जैसे दार्जिलिंग के पूर्व पालिकाध्यक्ष डीके प्रधान, तिलक चंद्र रोका, पेम्बा छिरिंग ओला की विमल गुरुंग को जरा भी चिंता नहीं है.
यदि यह हाल गोजमुमो के प्रमुख नेताओं का है तो फिर आम कार्यकर्ताओं को तो ये दोनों भूल भी गये होंगे. वह तो विनय तमांग हैं जो जेलों में बंद गोजमुमो कार्यकर्ताओं का हालचाल लेते रहे और उन्हें प्रयास कर जेलों से रिहा करवाने की कोशिश भी कर रहे हैं. विमल गुरुंग और रोशन गिरि की कथनी व करनी में भारी अंतर है. यह जनता को समझ लेना चाहिये.
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