20 अक्टूबर 1962 - जब मेजर धन सिंह थापा ने लद्दाख में चीनी सेना को चटाई धूल
दीपक राई
वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क
आज ही के दिन 20 अक्टूबर 1962 को लद्दाख की बर्फीली चोटियों पर भारतीय सेना की गोर्खाली वीरता का एक ऐसा इतिहास लिखा गया था, जिसे आज भी भारतीय सेना गर्व के साथ याद करती है। 1/8 गोरखा राइफल्स के मेजर धन सिंह थापा लद्दाख में एक अग्रिम चौकी की कमान संभाल रहे थे, जिस पर 20 अक्टूबर 1962 को चीनी सेना ने हमला कर दिया। उनकी कमान में, संख्या में बहुत कम होने के बावजूद, जवानों ने हमले को विफल कर दिया और दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया। दुश्मन ने तोप और मोर्टार से भारी गोलाबारी के बाद और बड़ी संख्या में दूसरा हमला किया। मेजर थापा के जवानों ने इस हमले को भी विफल करते हुए दुश्मन को भारी क्षति पहुंचाई।
इसके बाद चीनी सेना ने टैंकों के साथ तीसरी बार हमला किया। इस समय तक चौकी पर भारी नुकसान हो चुका था, लेकिन जवान डटे रहे। अंत में जब चीनी सेना ने चौकी पर कब्जा कर लिया, तो मेजर थापा अपनी खाई से बाहर निकले और हाथों-हाथ की लड़ाई में कई दुश्मनों को मार गिराया। उनके इस दुर्लभ साहस, विशिष्ट युद्ध कौशल और नेतृत्व के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। लेफ्टिनेंट कर्नल (तत्कालीन मेजर) धन सिंह थापा का यह बलिदान और शौर्य आज भी हर गोरखा और हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।

Post a Comment